राज्य सरकार की अपील खारिज, हजारों पंचायत कर्मचारियों को लाभ मिलने का रास्ता साफ
इंदौर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने पंचायत कर्मचारियों के वेतनमान को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें जनपद पंचायत और जिला पंचायत के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2006 से 6वें वेतन आयोग का लाभ देने के निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश में काम कर रहे हजारों पंचयात कर्मियों को 6 वें वेतमानमान मिलने का रास्ता साफ़ हो गया है।
क्या था मामला
खरगोन जिला पंचायत के कर्मचारी संतोष व अन्य मूल रूप से जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण (DRDA) में नियुक्त हुए थे, बाद में उनकी सेवाएं जिला पंचायत खरगोन में समाहित कर दी गईं। कर्मचारियों ने राज्य शासन के कर्मचारियों के समान 6वें वेतन आयोग का लाभ 01.01.2006 से दिए जाने की मांग की थी। पहले यह लाभ केवल 01.04.2013 से देने का निर्णय लिया गया था, जिसे कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। सिंगल बेंच ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने रिट अपील दायर की थी।
राज्य सरकार की दलील
राज्य सरकार ने तर्क दिया कि पंचायतों के पास अतिरिक्त आय का स्रोत नहीं है, इसलिए 6वें वेतन आयोग का लाभ 01.01.2006 से देना संभव नहीं है।
हाईकोर्ट का स्पष्ट रुख
डिवीजन बेंच ने कहा कि जब राज्य सरकार ने स्वयं 6वें वेतन आयोग को मंजूरी दी है, तो केवल तारीख अलग करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है। समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन देना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। यह निर्णय “समान काम के लिए समान वेतन” के सिद्धांत के खिलाफ है कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वित्तीय कठिनाई को मौलिक अधिकारों से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि समान प्रकृति का कार्य करने वाले कर्मचारियों के बीच वेतन में भेदभाव नहीं हो सकता। अस्थायी या स्थानीय निकाय के कर्मचारी भी वेतन समानता के हकदार हैं।
कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत
इस फैसले से हजारों पंचायत कर्मचारियों को लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले से एरियर की मांग भी मजबूत हुई और भविष्य में वेतन भेदभाव के मामलों पर अंकुश भी लगेगा।
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